जुगनू

गरीब की कब्र पर कहाँ कब दीप जलते है, रेगिस्तान मे आसानी से कहाँ फूल खिलते है। चांद-तारो की ख्वाहिश तो महल वाले रखते है, हम जुगनू है अपनी फिज़ाओ के....हम तो खुद से ही खुद को रोशन रखते है।।
अभिषेक शुक्ला "सीतापुर" नवोदित रचनाकार है।आपकी रचनाएँ वास्तविक जीवन से जुडी हुयी है।आपकी रचनाये युवा पाठको को बहुत ही पसंद आती है।रचनाओ को पढ़ने पर पाठक को महसूस होता है कि ये विषयवस्तु उनके ही जीवन से जुडी हुयी है।आपकी रचनाये अमर उजाला,रचनाकार,काव्यसागर तथा कई समाचार पत्रो व पत्रिकाओ मे प्रकाशित हो चुकी है।आपकी कई रचनाये अमेरिका से प्रकाशित विश्व प्रसिद्ध मासिक पत्रिका "सेतु "मे भी प्रकाशित हुई है।आपने अपनी रचनाओ से अपनी मातृभूमि जिला सीतापुर का गौरव व सम्मान बढ़ाया है।