चच्चा की फटफटिया

"नई सौखिनी महिया चच्चा लाये हमार फटफटिया,
बेचि डारिन घर की सबइ लौटिया थरिया।
कबहु हिया कबहु हुआ वहिका चलावति हई,
चाची कहिया बैठारि केरे खूब घुमावति हई।
टॉप गियर महिया वहिका खूब चलावति हई,
भीड़ देखी केरे हारन जोर बजावति हई।
हमहू चच्चा तेने करेन एक दिन विनतिया,
कि हमहूं कहिया चलावईक दई देउ अपनि फटफटिया।
लइकई चलि दिहेन हम वहिका रोड़ पर,
हम हूँ रहन  वहि दिन पूरे जोश पर।
तबहे समहे तेने आई गवा एक लरिका,
हम मारेंन बिरिक वहू तऊ बचिगा।
हम खाले पर हमरे ऊपर रहई फटफटिया।
हम तऊ बचिगेंन पर चकनाचूर हुई गई चच्चा केरि फटफटिया।।"

अभिषेक शुक्ला
सीतापुर
मो.न.
(सीतापुर की ग्रामीण अर्थात आंचलिक भाषा मे लिखी गयी रचना)
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