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कीमत तय है

शीर्षक-  कीमत तय है ईर्ष्या,प्रेम और जज़्बात की रिश्तों में खटास और मिठास की जीवन में दुःख और उल्लास की भविष्य में प्रकाश व अन्धकार की पर कीमत तय है हर बात की। तपन हो सूरज की किरणों की शीतलता चंद्रमा में आकाश की अपने और गैरों में विश्वास की बात हो वर्तमान या भूतकाल की पर कीमत तय है हर बात की। वादा हो या बात हो बेवफ़ाई की शान्त मन में उमड़ी तन्हाई की कुंठा में जीत आरोप प्रत्यारोप की हार मान लेना किसी की दुहाई की पर कीमत तय है हर बात की।। रचनाकार अभिषेक शुक्ला  सीतापुर, उत्तर प्रदेश

पत्रकार

कुछ रोटियों पर बिक गए... कुछ नशे और नोटों पर बिक गये ! ईमान की कलम थामी जिसने... उसके हजार दुश्मन पल मे बन गये !!

जल है जीवन

शीर्षक:- जल है जीवन  जल है जीवन  जल है पावन जल से सारा संसार चले। जीव- जन्तु और पेड़-पौधें, इससे ही पले बड़े होते। लगता है जग सब हरा-भरा, सुन्दर-सुन्दर सब वसुन्धरा। तुम तनिक समझ लो महत्व इसका, जल बिन जीवन सम्भव न किसी का। पीने योग्य सीमित ही जल है, जल है तब ही निश्चित कल है। जल संरक्षण से ही भविष्य हमारा, कर लो मन मे यह प्रण प्यारा। आओं मिलकर जल को बचाये, इसे निरर्थक हम कभी न बहाये। मिलकर देते है हम यह सन्देश, जल संरक्षण कर बनाओ सुन्दर देश। जल है जीवन,जल है पावन,जल से ही सारा संसार चले। हर नागरिक दायित्व समझकर जल संरक्षण की राह चले।। रचनाकार:- अभिषेक कुमार शुक्ला सीतापुर,उत्तर प्रदेश

फ़ीते

लघुकथा:- फ़ीतें शशि नाम की लड़की बन्डिया गाँव  मे रहती थी। वह बहुत बुद्धिमान किन्तु शरारती थी। उसकी छोटी बहन निशा सीधी-सादी थी। शशि और निशा के पिताजी प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे। स्कूल के पास मेले से उनके पिताजी ने लाल और हरे रंग के चार फीतें खरीदे। उन्होंने सोचा कि दो लाल रंग के फ़ीतें बड़ी बिटिया शशि को दे देंगे और दो हरे रंग के फ़ीतें छोटी बिटिया निशा को दे देंगे। दोपहर मे जब वह घर पहुंचे तो निशा सो रही थी बड़ी बिटिया शशि झूला झूल रही थी। अपने पिताजी को आते देख उनके पास गई और बोली पिताजी! मेरे लिए मेला से क्या लाए हो? पिताजी चारो फ़ीते उसे देते हुये बोले कि लाल वाले दो फ़ीतें तुम्हारे हैं और हरे वाले दो फ़ीतें तुम्हारी छोटी बहन निशा के है। शशि ने मन में सोचा कि कुछ ऐसा करूँ कि चारों फ़ीतें मुझे मिल जाए। दोपहर के बाद गांव  की बाजार जाने के लिए शशि तैयार हुई और साथ में अपनी छोटी बहन निशा को भी ले गई। दोनों बाजार पहुंची बाजार में चाट  व मिठाई खाई। उसके बाद शशि हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई अपनी बहन निशा को लेकर नाई की दुकान पर पहुंच गई। उसने नाई से कहा कि- "नाई चाचा! मेरी छोटी बहन ...

शरीफ़

शरीफ़ के लिए राजनीति नही। राजनीति मे कोई शरीफ़ नही।

शिक्षा की उड़ान

शीर्षक:- शिक्षा की उड़ान  तितली हूँ, मैं तितली हूँ आसमान मे उड़ती हूँ, रंग-बिरंगे फूलों से सतरंगी सपनें बुनती हूँ। इन्द्रधनुष-सी दुनिया मेरे ख्वाबों मे अब पलती है, झंझावत के काले मेघों मे दामिनी  बन सजती हूँ। लड़की हूँ,मैं लड़की हूँ,मैं भी तो पढ़ सकती हूँ, शिक्षा से सफ़लता की नई परिभाषा लिख सकती हूँ। बेटा- बेटी मे फ़र्क नही,यह पूरी दुनिया कहती है, सरकारी विद्यालय मे अच्छी शिक्षा मिलती है। पापा! नामांकन करा दो मेरा,मैं आपसे वादा करती हूँ, भईया की तरह मै भी आपका नाम रोशन कर सकती हूँ। रंग- बिरंगे फूलों से सतरंगी सपने बुनती हूँ। लड़की हूँ,मैं लड़की हूँ नए प्रतिमान गढ़ सकती हूँ। रचनाकार:- अभिषेक शुक्ला  सीतापुर,उत्तर प्रदेश

ट्रेन हमारी

बाल गीत- ट्रेन हमारी छुक-छुक चलती ट्रेन हमारी, लगती है यह सबको प्यारी। दूर-दूर तक सैर कराती, हमकों सारी दुनिया दिखलाती।। रचनाकार- अभिषेक शुक्ला सीतापुर,उत्तर प्रदेश

कलयुग

शीर्षक:- कलयुग भावना शून्य हो गई,शीर्ष पर अभिमान है, कलयुग की कली पुष्पित होने को तैयार है। रिश्तों की मर्यादा शून्य, आत्म केंद्रित विचार है, बूढ़े मातु-पिता हेतु अब तो वृद्धाश्रम तैयार है। समाज गूँगा हुआ और बहरी हुई  दीवार है, झूठ,छल,प्रपंच की माया अब तो अपरम्पार है। हर शक्स आभासी दुनिया मे जोड़े मित्र हज़ार है, पर मुसीबत मे अकेले ही कूटता छाती बारम्बार है। पुरुष घर- बाहर पुरुष उत्पीडन है झेल रहा, मर्द को दर्द नही इस दम्भ मे मुंह न खोल रहा। झूठी शान- शौकत की खातिर मर्यादा तार-तार हुई, देखो! कलयुग की माया किस तरह विस्तार हुई।   कलयुग मे कलि रूप मे आकर,अब प्रभु अवतार धरो, जनमानस के अभिषेक की खातिर यह प्रार्थना स्वीकार करो। रचनाकार- अभिषेक शुक्ला सीतापुर,उत्तर प्रदेश

बन्दर

शीर्षक: बाल गीत- मॉन्टी बन्दर छत पर बैठा मॉन्टी बन्दर, मै था अपने घर के अंदर। खिड़की से मै देख रहा था, बन्दर कैला खा रहा था। ईन्दर चाचा ने उसे भगाया, तब वह उनके ऊपर खुर्राया। रचनाकार:-  अभिषेक शुक्ला 'सीतापुर' उत्तर प्रदेश

कलयुगी

दम्भी घर मे कई मकान बना बैठे है, झूठी शान से अपनी दीवारें सज़ा बैठे है। खुद को समझते है खुदा और औरों से जुदा, झुग्गियों पर सनकी अपना नाम खुदा रखे है। मिथ्याभिमान मे कुरेद कर छाती पुरखों की, भ्रम की दुनिया मे ताजमहल बना बैठे है। कलयुगियों के क्या- क्या काण्ड बताऊँ, ये तो बड़े से बड़ा पाखण्ड किए बैठे है।

सूरत

कमरे से तस्वीर हटी पर आँखों मे उसकी सूरत बसती है। इश्क़ की यह आतिशबाजी छिपाये से भी न छिपती है।।

सामना

मैं फ़िर आऊंगा तुम्हारी महफिल मे....तुम लोग तो इकट्ठा करो जो मेरी शक्सियत का सामना कर सके।

प्रकृति

टूटकर शाख से फिर भी फूल देती है... यह प्रकृति ही तो परिवर्तन को जन्म देती है।

वज़ूद

अपना वज़ूद तलाशने वाले बराबरी की बात करते है,  जिन्हें ओस न हुई बर्दाश्त वो तूफान की बात करते है।

नया विद्यालय

मेरे प्रयास और परिश्रम से घर- घर शिक्षा दीप जले।  मेरे विद्यालय के हर बच्चें को अब नई पहचान मिले।

बाल पहेली

बाल पहेली- बूझों तो जाने   1. मोटर,साइकिल या हो कार, मेरे बिना सभी बेकार। गोल-गोल मेरा आकार, गली ,सड़क करुँ मै पार।   2. फूल - फूल मंडराती हूँ , तनिक बात उड़ जाती हूँ । रंग- बिरंगी पंखों वाली, मैं तो रानी बड़ी सयानी।   3. उछल- कूद मैं करता हूँ, कुतर- कुतर सब खाता हूँ । बिल्ली मौसी से डरता हूँ, मैं बिल के अंदर रहता हूँ।   4. धूल- धूप से आँखों को बचाता, सतरंगी यह दुनिया दिखलाता। बुढ़ापे मे जो कभी धुधला दिखता, रोशनी बढ़ाने मे यह काम आता।   रचनाकार:- अभिषेक शुक्ला शिक्षक,सीतापुर   उत्तर- 1.पहिया 2.तितली 3.चूहा 4.चश्मा

Article- corruption

Article:- To what extent is corruption justified? Nowadays everyone is looking for his comfort. Everyone's aim is to get their work done easily. People are also ready to pay the price for their comfort and ease of work and this is the reason for the birth of corruption. Corruption has become a part of everyone's life nowadays. Everyone has accepted it easily. Many efforts are also being made by the government to stop corruption. Many strict rules have also been made by the government to prevent corruption. The Anti Corruption team is also catching the corrupt employees and officials on receiving complaints. They are also being put in jail with punishment.  We need to think that why is corruption still not stopping? Unless the public is aware of it, it is not possible to stop corruption. People easily give big money to the officers to do their work. They not only give money to do their work but also provide valuable things.In return, they get their work done by the officers. ...

One liner

जनाब! मेरे शहर का बड़ा अजीब हाल है। यहाँ मरीज मस्त और तीमारदार बेहाल है।

One liner

साहब! वज़ूद की लड़ाई मे निमन्त्रण नही भेजे जाते।  जिनका जमीर हो जिन्दा वो खुद ही समर्थन मे आ जाते।। 

सत्य व शाश्वत त्रिभुवन सरकार

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शीर्षक: त्रिभुवन सरकार  शीर्षक: सत्य व शाश्वत त्रिभुवन सरकार  हमने अपने प्रजातांत्रिक भारत देश मे अनेक बार सरकार बनती और बिगड़ती देखी है। देश, प्रदेश और पूरी दुनिया मे सुव्यवस्थित रूप से जन कल्याण,विकास,सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और शिक्षा को प्राथमिकता देते हुये विकास पथ पर सुचारू रूप से बढ़ने के लिये सरकार का गठन किया जाता है।बहुमत प्राप्त दल को संवैधानिक आधार पर सरकार बनाने का अवसर दिया जाता है। सरकार लगभग पाँच वर्ष के बाद चुनाव उपरांत पुन: परिवर्तित होने की संभावना होती है। सरकार का चुनाव जनता द्वारा मतदान के आधार पर किया जाता है। मतदाता ही अगली सरकार का निर्धारण करने वाले भाग्य विधाता होते है। इस लोक मे सरकार तो आती जाती रहेगी किन्तु तीनो लोको की सरकार स्थायी और कल्याणकारी है। जो सरकार प्रभु श्रीराम की अनुकम्पा पर चलती है।  "दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥ सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥"  वेद,पुराण,उपनिषद और साधु-संतों के माध्यम से उस अलौकिक शक्ति का गुणगान हम बचपन से सुनते आये है। प्रभु की लीला अपरंपार है। उसकी व्य...